
'It's We The People, It's Not We The Judges': Neil Gorsuch Lays Out Views On Role Of Judges In US
Audio Summary
AI Summary
संविधान की व्याख्या के दो मुख्य विचार हैं: मूलवाद (Originalism) और जीवंत संविधानवाद (Living Constitutionalism)। मूलवाद का अर्थ है कि कानून या संविधान के शब्दों की व्याख्या उसी तरह की जानी चाहिए जैसे उन्हें लिखे जाने के समय एक सामान्य व्यक्ति करता। इसमें न्यायाधीशों को अपने विचार या कानून को अपनी इच्छा के अनुसार विकसित करने की अनुमति नहीं होती। न्यायाधीशों का काम है पन्ने पर लिखे हुए का सम्मान करना और यह देखना कि एक उचित व्यक्ति ने उस समय इसकी व्याख्या कैसे की होगी, न कि कुछ नया बनाना।
उदाहरण के लिए, "कानून की उचित प्रक्रिया" (due process of law) जैसा वाक्यांश आज भले ही अस्पष्ट लगे, लेकिन इसे लिखे जाने के समय इसका एक विशिष्ट कानूनी अर्थ था, जिसमें जूरी और सुनवाई के अवसर जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं।
इसके विपरीत, जीवंत संविधानवादी मानते हैं कि ये वाक्यांश इतने अनिश्चित हैं कि न्यायाधीशों को उनमें जान फूंकनी चाहिए और उन्हें वर्तमान समय के अनुसार विकसित करना चाहिए। वक्ता इस विचार का सम्मान करते हैं लेकिन इसका विरोध करते हैं कि यह काम न्यायाधीशों का है। उनका मानना है कि यदि संविधान में संशोधन करना है, तो यह "हम लोग" (we the people) के द्वारा किया जाना चाहिए, न कि न्यायाधीशों के द्वारा, क्योंकि यह एक लोकतंत्र है।
Get summaries like this automatically