
Fmr. National Sec. Advisor Bolton on Trump calling for Strait of Hormuz blockade: it "makes sense"
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यह चर्चा ईरान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर केंद्रित है, विशेषकर अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल की कीमतों के संदर्भ में। वक्ता का मानना है कि इस्लामाबाद में बातचीत की विफलता यह स्पष्ट करती है कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा और युद्धविराम एक गलती थी। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ हफ्ते पहले ईरानी तेल के शिपमेंट पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाना इस समस्या का एक कारण बताया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय तेल की बढ़ती कीमतों के डर से प्रेरित था।
वक्ता इस बात पर जोर देते हैं कि यदि फारस की खाड़ी के अरब देशों का तेल या ईरानी तेल बाहर नहीं आता है, तो तेहरान में लोग कैसा महसूस करेंगे, यह देखना होगा। शासन परिवर्तन के मुद्दे पर भी बात की गई है, जहाँ अमेरिका प्रशासन का मानना है कि वर्तमान स्थिति में क्या हुआ है, यह स्पष्ट नहीं है। ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए अमेरिका के पास शासन परिवर्तन के बिना कोई रास्ता नहीं है। यदि शासन के व्यवहार को नहीं बदला जा सकता और अस्वीकार्य खतरे (जैसे मशरूम क्लाउड में गायब होना) के तहत नहीं रहना चाहते, तो उत्तर शासन को बदलना है।
यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान प्रशासन में लोगों ने सोचा था कि यह शासन अधिक टिकाऊ साबित हुआ है। वक्ता सोच रहे हैं कि यदि वे लड़खड़ाना शुरू कर देते हैं, तो उनकी जगह क्या लेगा। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अमेरिका ने जिस समझौते से हाथ खींचा, क्या वह एक स्मार्ट निर्णय था, और क्या सरकार के संदर्भों के 1% से भी कम के लिए एक कार्यक्रम की पुष्टि करना उचित था। कुल मिलाकर, यह बातचीत ईरान के परमाणु कार्यक्रम, शासन परिवर्तन की संभावना और अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर इसके प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती है।