
'But It Wasn't By Clear And Convincing?': Barrett Asks Attorney About Standard Of Evidence At Border
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प्रस्तुत चर्चा एलिस आइलैंड पर आव्रजन अधिकारियों द्वारा लागू किए गए फ़िल्टरों और "स्पष्ट और ठोस सबूत" (clear and convincing evidence) के मानक पर केंद्रित है। सवाल यह है कि क्या "स्पष्ट और ठोस सबूत" का मतलब केवल किसी अपराध के लिए दोषसिद्धि का प्रमाण है, या इसमें और भी कुछ शामिल हो सकता है।
एक पक्ष का तर्क है कि कानून में "दोषसिद्धि" शब्द का उल्लेख नहीं है, बल्कि "किया गया" (committed) शब्द का प्रयोग किया गया है, और यह विदेशों में आपराधिक आचरण में लिप्त होने पर भी लागू होता है। उनका मानना है कि "स्पष्ट और ठोस सबूत" के लिए किसी प्रकार के न्यायिक निर्णय या सुनवाई की आवश्यकता होगी, न कि सीमा पर एक त्वरित मिनी-ट्रायल की। इसके बजाय, यह अधिकारी के विश्वास के स्तर पर निर्भर करता है कि उसके पास मौजूद जानकारी पर्याप्त है या नहीं, यह तय करने के लिए कि क्या किसी स्थायी निवासी (LPR) को देश में लौटने के अपने वैधानिक अधिकार से वंचित किया जाना चाहिए।
दूसरे पक्ष का सुझाव है कि "स्पष्ट और ठोस सबूत" आमतौर पर दोषसिद्धि या अपराध के तत्वों को स्वीकार करने से संतुष्ट होता है। हालांकि, यह भी कल्पना की जा सकती है कि किसी व्यक्ति के सामान में अपराध के सबूत मिल सकते हैं, जैसे कि उनकी डायरी। लेकिन सामान्यतः, यह या तो दोषसिद्धि का रिकॉर्ड होगा, जो अधिकारियों के पास डेटाबेस में होता है, या एक स्वीकारोक्ति।
इस मामले में, अधिकारी ने लंबित आरोप के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि श्री लाउ वास्तव में अस्वीकार्य थे, जिसका अर्थ है कि उन्होंने लंबित आरोप से ही दोषसिद्धि पाई। यह कानूनी रूप से सही नहीं है। सीमा पर गवाहों को बुलाकर और पूछताछ करके निर्णय लेने की प्रक्रिया बहुत लंबी होगी और इसके लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
अधिकारी के लिए यह एक मुश्किल काम हो सकता है, लेकिन यह कांग्रेस की पसंद को दर्शाता है कि स्थायी निवासियों को घर लौटने का अधिकार है। सरकार के पास बाद में निर्वासन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प उपलब्ध हैं।