
Fmr Indian Navy Officer Says US Hormuz Escort Plan Raises Huge Risks
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यू.एस. का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को मार्गदर्शन देगा, लेकिन यह एक युद्ध का कार्य है और इसकी वैधता तथा इसे लागू करने की क्षमता पर सवाल उठते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की मानवीय आधार पर जहाजों को एस्कॉर्ट करने की पहल से अनपेक्षित वृद्धि का खतरा है। यदि किसी जहाज पर हमला होता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कई अनुत्तरित प्रश्न हैं: क्या ट्रंप ने अन्य देशों से बात की है? क्या विध्वंसक जलडमरूमध्य में जाएंगे या बाहर से एस्कॉर्ट करेंगे? क्या खदानों का खतरा है? वर्तमान में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यह पहले के सुरक्षित मार्ग के वादे से अलग नहीं है, लेकिन अब यू.एस. भी इस नाकाबंदी का प्रभाव महसूस कर रहा है।
यह भी चिंता का विषय है कि क्या सभी जहाजों को एस्कॉर्ट किया जाएगा, या कुछ को प्राथमिकता दी जाएगी। विदेशी झंडे वाले जहाजों का क्या होगा? क्या वे इसे स्वीकार करेंगे? यह संप्रभुता का मुद्दा भी उठाता है। सामान्य तौर पर प्रतिदिन 100 टैंकर गुजरते हैं, लेकिन यू.एस. शायद 20 जहाजों को ही एस्कॉर्ट कर पाएगा, दो या तीन काफिलों में, क्योंकि उसके पास इतनी क्षमता नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में खदानें और ईरानी गश्ती नौकाएं प्रमुख खतरे हैं। भारत ने इस संघर्ष में कोई पक्ष नहीं लिया है और उसके ईरान तथा यू.एस. दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश है, और यह उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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