
Hassett on Powell Staying at Fed, Inflation and Oil Spike
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वक्ता ने फेडरल रिजर्व और चेयरमैन पॉवेल के हालिया फैसलों पर चर्चा की, जहाँ पॉवेल फेड अध्यक्ष पद से हट गए लेकिन गवर्नर बने रहे। प्रशासन को इस बदलाव की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जिससे निराशा व्यक्त की गई। केविन वॉल्श की पुष्टि की प्रतीक्षा है, जिनके आने से फेड में बड़े बदलाव की उम्मीद है। राष्ट्रपति ने पॉवेल के काम जारी रखने पर अपनी निराशा व्यक्त की है, यहाँ तक कि उन्हें पद से हटाने का सुझाव भी दिया था।
वक्ता का मानना है कि फेड की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए, और मौजूदा स्थिति को सुलझाने के लिए डी-एस्केलेशन आवश्यक है। आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में पूंजीगत व्यय में वृद्धि हुई है, और आयात में पूंजीगत वस्तुओं का हिस्सा बढ़ा है, जो मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है। प्रारंभिक दावे 1960 के दशक के बाद सबसे कम हैं, और सरकारी रोजगार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे कम है।
हालांकि, ऊर्जा बाजारों में अस्थायी व्यवधान गंभीर है, जिससे गैसोलीन की कीमतें बढ़ रही हैं। वक्ता का मानना है कि तेल संकट के दौरान ब्याज दरें बढ़ाना एक नीतिगत गलती होगी, खासकर जब यह व्यवधान अस्थायी होने की उम्मीद है। कोर मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, और उत्पादकता में वृद्धि से कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर आवासीय निवेश को।
ईरान में हाइपरइन्फ्लेशन और खाद्य संकट के बीच, अमेरिका ने ऊर्जा कीमतों को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे कैलिफोर्निया में अपतटीय ड्रिलिंग खोलना और इथेनॉल मानकों को बदलना। जर्मनी के चांसलर की टिप्पणियों पर, वक्ता ने यूरोपीय सहयोगियों को अपने ऊर्जा नीतियों पर पुनर्विचार करने की सलाह दी।