
Vance, Witkoff, Kushner Depart Pakistan
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यह चर्चा पिछले छह हफ्तों से चल रहे युद्ध और अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर केंद्रित है। इस्लामाबाद में 21 घंटे की बातचीत में युद्ध समाप्त करने का समझौता न हो पाना तर्कसंगत माना गया, क्योंकि कूटनीति में समय लगता है। जेसीपीओए (JCPOA) समझौते जैसे बड़े सौदों को विकसित होने में दो साल तक का समय लग सकता है, और इसमें दोनों पक्षों को कुछ रियायतें देनी पड़ती हैं।
ट्रम्प प्रशासन की मांगों को "अधिकतमवादी" बताया गया है, और यह स्पष्ट नहीं है कि वे ईरान को क्या रियायतें दे रहे हैं। जिनेवा और फरवरी में हुई पिछली वार्ताओं के बाद से इन मांगों में कोई खास बदलाव नहीं आया है, जब ट्रम्प ने इजरायल के साथ मिलकर तेहरान पर हमला करने का फैसला किया था। शांति समझौते तभी संभव होते हैं जब दोनों पक्ष थक जाते हैं और शांति के लिए तैयार होते हैं, लेकिन यहां ईरान की तरफ से ऐसी कोई तैयारी नहीं दिख रही है। ईरान ने हाल के हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने और वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने की क्षमता दिखाई है, जिससे अमेरिका और पश्चिमी यूरोप को काफी नुकसान हुआ है। सवाल यह है कि क्या वे इस लाभ का उपयोग आगे भी करते रहेंगे।
वाशिंगटन से जेफ ने बताया कि पाकिस्तान में इन दो पक्षों का एक साथ आना ही अपने आप में एक सफलता थी। हालांकि, उपराष्ट्रपति वैंस वॉशिंगटन बिना किसी सफल समझौते के लौट रहे हैं, और उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने की कोई मौखिक घोषणा भी नहीं हुई है, जो एक झटका है। ट्रम्प ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर बमबारी की धमकी को दो सप्ताह के लिए टाल कर एक "ऑफ-रैंप" बनाया था, लेकिन अब उनके पास कोई समझौता नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या वह अपनी धमकियों को फिर से दोहराएंगे, या सैन्य अभियान की ओर लौटेंगे।
इजरायल इस बातचीत का हिस्सा नहीं था, और लेबनान में इजरायली मोर्चे को ईरान और पाकिस्तान बातचीत का हिस्सा बनाना चाहते थे। प्रधान मंत्री नेतन्याहू और राष्ट्रपति ट्रम्प इस स्थिति पर सहयोग कर रहे हैं। ट्रम्प ने नेतन्याहू को लेबनान के साथ "लो की" रहने को कहा था, और नेतन्याहू ने बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, हालांकि उन्होंने संघर्ष समाप्त नहीं किया। ट्रम्प चाहते हैं कि इजरायल लेबनान के साथ संघर्ष को कम करे ताकि ईरान के साथ एक सफल समझौता हो सके।
अमेरिकी वार्ताकार पाकिस्तान से लौट चुके हैं। ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें समझौते की जरूरत नहीं है, लेकिन ईरान ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की क्षमता दिखाई है। नवंबर में चुनाव होने के कारण ट्रम्प को अपने मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होना होगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह शांति वार्ता विफल हो जाती है, तो वे तुरंत सैन्य विकल्प पर नहीं जाएंगे, क्योंकि "हमेशा के लिए युद्ध" से बचने का राजनीतिक दबाव है।
उपराष्ट्रपति वैंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख नहीं किया। ट्रम्प ने कहा था कि जलडमरूमध्य अपने आप खुल जाएगा, और अमेरिका इसका उपयोग नहीं करता है। हालांकि, जेफ का मानना है कि यह परिदृश्य केवल यूरोप के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी बड़े आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव डालेगा, क्योंकि अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ट्रम्प होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध के बारे में मिश्रित संदेश दे रहे हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो रहा है कि उनकी अगली चाल क्या होगी।
इजरायली इस संघर्ष के अंत चाहते हैं और ईरानी परमाणु हथियार के मुद्दे का समाधान चाहते हैं। नोरा का मानना है कि ट्रम्प इस मुद्दे को हल करना चाहते हैं, लेकिन ईरानी बातचीत में झूठ बोल रहे हैं, जिससे वार्ताकार असंतुष्ट थे और उन्होंने बातचीत को समाप्त कर दिया। वे एक मसौदा छोड़कर गए हैं और पूर्ण उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।