
Amy Coney Barrett Asks Lawyer: What Constitutes A Suit That Violates The Seventh Amendment?
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वकील मिस्टर वॉल का तर्क है कि अगर किसी आदेश का पालन करना बाध्यकारी नहीं है, तो भी यह सातवें संशोधन का उल्लंघन कर सकता है। वे बताते हैं कि यह एक स्पेक्ट्रम की तरह है, जहाँ सिफारिशें स्वीकार्य हैं और निर्णय सातवें संशोधन के दायरे में आते हैं। यदि कोई एजेंसी किसी निर्णय पर पहुँचती है और फिर कहती है कि उन्हें भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है और वे जूरी के सामने नहीं जा सकते, तो यह समस्याग्रस्त है।
न्यायाधीश बैरेट के पूछने पर कि यदि HOBS अधिनियम के तहत भुगतान किए बिना समीक्षा की जा सकती है, तो मिस्टर वॉल मानते हैं कि यह एक कठिन प्रश्न होगा। वे सातवें संशोधन के लिए "कानून के अनुसार मुकदमा" को "कानून के अनुसार दावे का निर्णय" मानते हैं, न कि इक्विटी का। उनका कहना है कि जब कोई एजेंसी देयता तय करती है, तो सातवां संशोधन लागू होता है, और एजेंसी केवल इसे गैर-बाध्यकारी या सलाहकार कहकर बच नहीं सकती।
मिस्टर वॉल ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे निर्णयों के वास्तविक दुनिया में गंभीर परिणाम होते हैं, जैसे कि $100 मिलियन का जुर्माना। वे मानते हैं कि केवल एक गैर-बाध्यकारी लेबल लगाकर सातवें संशोधन के विश्लेषण से बचा नहीं जा सकता। हालांकि वे स्वीकार करते हैं कि यह एक कठिन मामला होगा, खासकर यदि अपील का अधिकार हो, लेकिन उनका मानना है कि वे फिर भी जीतेंगे।
वे इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि सरकार एक संवैधानिक उल्लंघन से बचने के लिए कानून की असामान्य व्याख्या कर रही है, जबकि वे खुद स्वीकार करते हैं कि यदि वे कानून को सही ढंग से समझते हैं तो संवैधानिक प्रश्न आसान होगा। वे "assess" या "impose" जैसे शब्दों की व्याख्या पर भी सवाल उठाते हैं, और बताते हैं कि दशकों तक किसी ने भी इन आदेशों को गैर-बाध्यकारी नहीं माना था।