
An Israeli And Palestinian Both Lost Loved Ones In The Conflict— Now They Work Together For Peace
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फोर्ब्स की ब्रेकिंग न्यूज़ रिपोर्टर ब्रिटनी लेविस ने शांति कार्यकर्ता अज़ीज़ अबू सारा और मौस नान का साक्षात्कार लिया, जो "द फ्यूचर इज़ पीस" पुस्तक के लेखक हैं। अज़ीज़ एक फिलिस्तीनी शांति कार्यकर्ता हैं और मौस एक इज़राइली शांति कार्यकर्ता हैं। उनकी दोस्ती अक्टूबर 7 की घटना के बाद बनी, जब मौस ने अपने माता-पिता को खो दिया और अज़ीज़ ने उन्हें फेसबुक पर सांत्वना संदेश भेजा। मौस के युवा भाई ने बदला लेने की बजाय शांति का मार्ग चुनने का सुझाव दिया, यह मानते हुए कि बदला लेने से हिंसा और पीड़ा का चक्र ही बढ़ेगा।
अज़ीज़ ने बताया कि मौस से उनकी केवल एक बार 10 साल पहले मुलाकात हुई थी, लेकिन उन्होंने मौस के माता-पिता की मृत्यु की खबर सुनकर तुरंत उनसे संपर्क करने का फैसला किया। उनका मानना है कि सहानुभूति और दूसरों के अंधेरे क्षण में उनके साथ खड़ा होना बहुत महत्वपूर्ण है। मौस ने कहा कि अज़ीज़ का संदेश उनके लिए दुख के सागर में डूबने से बचाने वाला हाथ था, और अब अज़ीज़ उनके परिवार का हिस्सा बन गए हैं।
दोनों ने अपनी कहानियों को साझा करने में समानता बनाए रखने पर जोर दिया, जैसे कि अज़ीज़ ने अपने भाई को खोया और मौस ने अपने माता-पिता को। उन्होंने कहा कि गुस्सा और बदला लेने की भावना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें दबाने की बजाय उन भावनाओं के साथ काम करना महत्वपूर्ण है ताकि वे हिंसा और विनाश में न बदलें। उन्होंने अपनी पुस्तक में भी इस पर चर्चा की है।
अज़ीज़ ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा को सामान्य नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यह दुनिया के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है। मौस ने बताया कि उन्होंने 30 साल की उम्र तक फिलिस्तीनियों के बारे में कुछ नहीं जाना था, जिससे उन्हें अज्ञानता की दीवारों में रहने का एहसास हुआ। उन्होंने लोगों को अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर दूसरों तक पहुंचने, संवाद करने और शांति कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।
दोनों ने मुश्किल बातचीत की क्षमता पर भी जोर दिया। अज़ीज़ ने अपने पिता के होलोकॉस्ट के बारे में एक विवादित सवाल का उदाहरण दिया, जिसने एक इजरायली व्यक्ति के साथ एक आंखें खोलने वाला संवाद शुरू किया। इस घटना के बाद, 70 फिलिस्तीनी होलोकॉस्ट मेमोरियल गए और बाद में 70 इजरायली फिलिस्तीनी गांवों के बारे में जानने गए, जो 1948 में नष्ट हो गए थे।
उन्होंने अपनी "शांति तीर्थयात्रा" के बारे में भी बताया, जिसमें उन्होंने गाजा, तेल अवीव, नाज़रेथ और वेस्ट बैंक का दौरा किया। मौस ने कहा कि यह यात्रा इस विश्वास को मजबूत करती है कि "भविष्य शांति है, यह केवल एक इच्छा नहीं है, बल्कि एक सच्चाई है।" अज़ीज़ ने यादों की जटिलता और नाज़रेथ में शांति की संभावना पर बात की, जहाँ मौस की यहूदी बेटी फिलिस्तीनी शहर में पूरी तरह सहज महसूस करती थी।
मौस ने नाज़रेथ में अपने माता-पिता के लिए एक शिवा (शोक सभा) का भी आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों फिलिस्तीनी दोस्त शामिल हुए, यह दर्शाता है कि शांति कितनी करीब है। उन्होंने 1977 में मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की इज़राइल यात्रा का उदाहरण दिया, जिसने दो सप्ताह में सार्वजनिक राय को बदल दिया। अज़ीज़ ने कहा कि राजनेता अक्सर हमें बताते हैं कि हमारी आवाज़ें मायने नहीं रखतीं, लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने उत्तरी आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका के शांति समझौतों का उदाहरण दिया, यह दर्शाते हुए कि अगर वे कर सकते हैं, तो इज़रायल और फिलिस्तीन भी कर सकते हैं।
पुस्तक "द फ्यूचर इज़ पीस" अब हर जगह उपलब्ध है, और लेखक अमेरिका में पुस्तक के प्रचार के लिए यात्रा कर रहे हैं।