
How Fragile Is The US-Iran Ceasefire? | Insight with Haslinda Amin 4/8/2026
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अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बनी है। इस खबर के बाद तेल की कीमतें गिर गई हैं और शेयर बाजारों में उछाल आया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद यह युद्धविराम हुआ है, और इस्लामाबाद में बातचीत की तैयारी चल रही है।
हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बरकरार है। पूर्व अमेरिकी खुफिया सलाहकार माइकल प्रेगेंट का मानना है कि यह युद्धविराम बहुत नाजुक है। उन्होंने कहा कि पहले से ही कुछ उल्लंघन हुए हैं, जैसे इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलें दागी गई हैं। ईरान ने अपनी 10-सूत्रीय शांति योजना प्रस्तुत की है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेना भी शामिल है। हालांकि, अमेरिका और अन्य देश इसे "नॉन-स्टार्टर" मानते हैं, क्योंकि वे इसे एक मुक्त समुद्री गलियारा मानते हैं।
पाकिस्तान ने इस समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि उसे ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है और उसे तेल और गैस के निरंतर प्रवाह की आवश्यकता है। चीन ने भी इस युद्धविराम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि वह ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और ईरान का एक प्रमुख आर्थिक भागीदार है।
इस युद्धविराम से वैश्विक एयरलाइंस को कुछ उम्मीद मिली है, क्योंकि ईंधन की लागत में वृद्धि और उड़ानों में कटौती के कारण उन्हें काफी नुकसान हुआ था। IATA के महानिदेशक विली वॉल्श का कहना है कि यह युद्धविराम तेल के प्रवाह को सामान्य करने में मदद करेगा, लेकिन जेट ईंधन की कीमतों को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। उनका मानना है कि तेल की कीमतें कम होने पर भी हवाई टिकट महंगे रहेंगे, क्योंकि एयरलाइंस को बढ़ी हुई लागत को पूरा करना होगा।
कुल मिलाकर, यह युद्धविराम एक अस्थायी राहत है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास और ईरान की मांगों के कारण एक स्थायी शांति समझौते की संभावना कम ही दिख रही है।