
'It's Sad': Grothman Claims Students Have To 'Pretend' To Be Progressive To Get Decent Grades
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वक्ता का मानना है कि 2020 के दशक में अमेरिकी कॉलेज के छात्र सबसे ज़्यादा दबे हुए महसूस करते हैं कि वे क्या कह सकते हैं या लिख सकते हैं। कई छात्र शिकायत करते हैं कि अच्छे ग्रेड पाने के लिए उन्हें अपने निबंधों और परीक्षाओं में वामपंथी प्रगतिशील होने का नाटक करना पड़ता है, जो उन्हें झूठ बोलने पर मजबूर करता है। यह स्थिति 1960 के दशक के कम्युनिस्ट चीन जैसी है, जहाँ सच न होने वाली बातें बोलनी पड़ती थीं। पत्रकारिता और राजनीति विज्ञान जैसे वैचारिक विषयों में यह ज़्यादा होता है। विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय प्रणाली में 100 से ज़्यादा अंग्रेजी साहित्य प्रोफेसरों में से केवल एक रिपब्लिकन है।
सवाल यह उठता है कि क्या कोई विश्वविद्यालय सक्रिय रूप से रूढ़िवादी पत्रकारिता या अंग्रेजी साहित्य प्रोफेसरों को नियुक्त करने की कोशिश कर रहा है? टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय ने अपनी पत्रकारिता कार्यक्रम को पुराने स्कूल के उदारवादी तरीके से फिर से शुरू किया है, जिसमें निष्पक्ष रूप से सच बताने पर ज़ोर दिया गया है। हालांकि, छात्रों को अभी भी अपने विचारों को छिपाना पड़ता है ताकि प्रोफेसरों से प्रतिकूल प्रतिक्रिया न मिले। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि छात्र कक्षा में और अपने असाइनमेंट में आत्म-सेंसरशिप करते हैं। बौद्धिक विविधता की कमी एक बड़ी समस्या है, खासकर संकाय के बीच। हालांकि, कुछ सुधार के संकेत हैं, जैसे कि परिसरों में नागरिक केंद्रों का निर्माण, जहाँ छात्र बौद्धिक विविधता पा सकते हैं।