
'Of Course Genocide Is Bad!': Things Heat Up Fast After Reporter Asks Stefanik About Trump Iran Post
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यह अंश यहूदी समुदाय में कॉलेज अध्यक्षों की आलोचना के बारे में है, जिन्होंने "नदी से समुद्र तक" नारे लगाने वाले छात्रों की निंदा करने से इनकार कर दिया था। इस नारे को कई यहूदी और वक्ता भी "नरसंहार" का आह्वान मानते हैं, जिसका अर्थ इज़राइल में सभी यहूदियों को मिटाना है। वक्ता का मानना है कि एक पूरी सभ्यता को मिटाना नरसंहार है और ऐसा करने का आह्वान नहीं किया जाना चाहिए।
वक्ता ने जोर देकर कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालयों से एक सीधा सवाल पूछा था: "क्या यहूदियों के नरसंहार का आह्वान करना आपके विश्वविद्यालय के आचार संहिता का उल्लंघन करता है, हाँ या नहीं?" दुनिया ने देखा कि कैसे इन विश्वविद्यालयों ने यह कहते हुए टालमटोल किया कि यह "संदर्भ पर निर्भर करता है।" वक्ता ने इसे गलत बताया और कहा कि उनके बयान ने उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव ला दिया है, जिससे विश्वविद्यालयों को अब इन आंतरिक मुद्दों को संबोधित करना पड़ रहा है।
बहस तब राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा "पूरी ईरानी सभ्यता को मिटाने" की धमकी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाती है। वक्ता ने स्पष्ट किया कि ट्रम्प का ध्यान ईरानी "आतंकवादी शासन" पर था, न कि पूरी सभ्यता पर। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रम्प के मजबूत बयानों ने ईरानियों को बातचीत की मेज पर लाया और युद्धविराम का कारण बना। वक्ता का मानना है कि ईरानी आतंकवादी शासन ने हमास और हिजबुल्लाह को वित्त पोषित किया है, जिससे यहूदी-विरोधी भावना में वृद्धि हुई है।
हालांकि, दूसरा वक्ता (जेक) यह तर्क देता है कि ट्रम्प ने "शासन" को मिटाने की बात नहीं की, बल्कि "आपकी पूरी सभ्यता मर जाएगी" कहा। जेक ने कॉलेज के छात्रों द्वारा "नदी से समुद्र तक" चिल्लाने की निंदा और राष्ट्रपति द्वारा पूरी सभ्यता को मिटाने की धमकी के बीच एक दोहरा मापदंड होने का आरोप लगाया। वक्ता ने यह कहते हुए पलटवार किया कि जेक ट्रम्प के मुंह में शब्द डाल रहा है और उनका लक्ष्य ईरानी आतंकवादी शासन था, जिसने मध्य पूर्व में दशकों से संघर्ष पैदा किया है और आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक है।
वक्ता ने जोर देकर कहा कि ट्रम्प की कूटनीति ने ईरानियों को मेज पर लाया और युद्धविराम सुनिश्चित किया, जिससे मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नरसंहार हर जगह गलत है और विश्वविद्यालय अध्यक्षों ने नरसंहार के आह्वान की निंदा करने में विफल होकर गलती की, जबकि ट्रम्प का लक्ष्य केवल आतंकवादी शासन था। बहस इस बात पर समाप्त होती है कि क्या ट्रम्प के बयान नरसंहार का आह्वान थे या केवल ईरानी आतंकवादी शासन को लक्षित करने वाले राजनयिक दबाव का एक रूप थे।