
'Can You Explain The Burden?': Harris Asks Lawyer About Illegal Immigrants Using Public Education
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यह वीडियो इस बात पर चर्चा करता है कि कैसे 2022 के DOMS सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने Plyer v. Doe को पलटने का आधार तैयार किया। वक्ता, मिस्टर रोजर्स, बताते हैं कि DOMS निर्णय ने पांच मानक स्थापित किए हैं कि क्या किसी पूर्व फैसले को पलटा जाना चाहिए। पहला, क्या अदालत की त्रुटि गंभीर थी। दूसरा, निर्णय के तर्क की गुणवत्ता। Plyer v. Doe के मामले में, निर्णय का तर्क बहुत कमजोर था और केवल "अच्छी नीति" पर आधारित था, न कि कानूनी तर्क पर। तीसरा, क्या मानक काम करने योग्य है। Plyer v. Doe द्वारा बनाया गया मानक अस्पष्ट है और इसे परिभाषित करना या समझना मुश्किल है। चौथा, अन्य कानूनी क्षेत्रों पर इसका प्रभाव। इस निर्णय ने राज्यों की शिक्षा नीतियों को लागू करने की क्षमता को प्रभावित किया है। अंत में, पांचवां, निर्भरता हित। Plyer v. Doe के मामले में कोई वित्तीय निर्भरता हित नहीं था। रोजर्स का मानना है कि ये सभी पांच मानक Plyer v. Doe को बनाए रखने के खिलाफ हैं।
मिस्टर ओ'ब्रायन बताते हैं कि कैसे सुप्रीम कोर्ट ने Plyer v. Doe मामले में विधायी शाखा की तरह काम किया, न कि न्यायिक शाखा की तरह। उनका तर्क है कि अदालत का काम लिखे हुए कानून को लागू करना है, न कि नीतिगत निर्णय लेना। Plyer v. Doe में, अदालत ने नीतिगत आधार पर फैसला सुनाया, जबकि नीतिगत निर्णय लेना कांग्रेस का काम है।
वीडियो में यह भी चर्चा की गई है कि अवैध अप्रवासियों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने से राज्यों के शिक्षा प्रणालियों पर कितना बोझ पड़ता है। रोजर्स बताते हैं कि ये बच्चे अक्सर अंग्रेजी नहीं बोलते हैं और उन्हें विशेष सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिससे अमेरिकी बच्चों के लिए सीमित संसाधनों के कारण उन सेवाओं को प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। वे इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि पर्यटक वीज़ा पर आने वाले अस्थायी अप्रवासियों को अपने बच्चों के लिए ट्यूशन देना पड़ता है, जबकि अवैध अप्रवासी ऐसा नहीं करते, जो अनुचित है। अंत में, यह उल्लेख किया गया है कि कुछ राज्य ऐसे कानून पारित करने पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें अवैध अप्रवासियों के बच्चों के लिए शिक्षा का वित्तपोषण न करना पड़े।