
Why Modern War Needs Intelligent Power Systems | Chariot Defense CEO on a16z
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इस चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि युद्ध के मैदान में सैनिकों के लिए बिजली एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखी चुनौती है। आज के सैनिक अपनी गतिविधियों के दौरान 30 से 60 वॉट बिजली लगातार इस्तेमाल करते हैं, जो एक मिड-टियर लैपटॉप के लगातार चलने के बराबर है। युद्ध का मैदान तेजी से इलेक्ट्रॉनिक होता जा रहा है, जिसमें ड्रोन, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग बढ़ रहा है। इन सभी प्रणालियों को चलाने के लिए एक मजबूत बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में अक्सर अपर्याप्त होती है।
शेरियट डिफेंस के सीईओ एडम वॉर्मथ बताते हैं कि उनकी कंपनी रोबोटिक युद्ध के लिए सामरिक बिजली परत का निर्माण कर रही है। उनका लक्ष्य एकीकृत बैटरी पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोकंट्रोलर सिस्टम बनाना है जो हाइब्रिड सिस्टम को सक्षम करते हैं। इसका मतलब है कि डीजल जनरेटर को पूरी तरह से बदलना नहीं, बल्कि मौजूदा बिजली उत्पादन के साथ मिलकर अधिक स्मार्ट और सामरिक तरीके से बिजली का उपयोग और वितरण करना।
यूएस आर्मी के सीटीओ एलेक्स मिलर इस बात पर जोर देते हैं कि उनका काम सैनिकों के जीवन को आसान और बेहतर बनाना है। उनका मानना है कि वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए जमीनी स्तर पर जाना और सैनिकों से सीधे बात करना महत्वपूर्ण है। वे इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि मौजूदा बिजली समाधानों में अक्सर कमियां होती हैं, जैसे कि भारी और अक्षम जनरेटर जो थर्मल और ध्वनिक सिग्नेचर उत्पन्न करते हैं, जिससे दुश्मन द्वारा पता लगने का खतरा बढ़ जाता है।
एक महत्वपूर्ण समस्या यह है कि सामरिक संचालन केंद्र अब छोटे और अधिक वितरित हो गए हैं। पहले बड़े, स्थायी ठिकानों पर रहने वाली क्षमताएं अब कंपनी और प्लाटून स्तर तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे बिजली की मांग बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, एक कॉफी पॉट लगाने से एयर डिफेंस रडार बंद हो सकता है क्योंकि बिजली प्रबंधन प्रणाली पर्याप्त स्मार्ट नहीं है।
शेरियट का पहला उत्पाद, M424 सिस्टम, एक 4 किलोवाट, 4 किलोवाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण प्रणाली है जिसे टीम से बटालियन स्तर तक तैनात किया जा सकता है। यह प्रणाली एक कनवर्टर बफर मैनेजर के रूप में कार्य करती है, जिससे बड़े बिजली के उछाल को संभाला जा सकता है, जनरेटर को कम सिग्नेचर मोड में बंद किया जा सकता है, और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली प्रदान की जा सकती है।
आर्मी के आधुनिकीकरण प्रयासों में अधिग्रहण और प्रौद्योगिकी एकीकरण में सुधार शामिल है। इसमें खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, अनावश्यक नौकरशाही को कम करना और वाणिज्यिक उद्योग से नई तकनीकों को तेजी से अपनाना शामिल है। "ट्रांसफॉर्मिंग इन कॉन्टैक्ट" जैसी पहल कमांडरों को अपनी इकाइयों को मिशन के लिए संगठित करने की सुविधा देती है, जिससे वे यह पहचान सकें कि कौन सी तकनीकें काम करती हैं और कौन सी नहीं।
बैटरी आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता एक बड़ी चिंता है। सेना इस अंतर को पाटने के लिए घरेलू बैटरी उत्पादन में निवेश कर रही है और अमेरिकी औद्योगिक आधार को मजबूत कर रही है। लक्ष्य केवल युद्ध विभाग की समस्याओं को हल करना नहीं है, बल्कि अमेरिकी विनिर्माण और नवाचार के लिए अवसर पैदा करना भी है।
24 महीनों में सामरिक बिजली आधुनिकीकरण की सफलता का मतलब यह होगा कि सैनिकों को अब बिजली की समस्याओं के बारे में चिंता नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि यह एक पारदर्शी और विश्वसनीय बुनियादी ढांचा बन जाएगा। वे अपने मिशन उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे, जिससे उनकी घातकता, उत्तरजीविता और परिचालन स्वतंत्रता में वृद्धि होगी।