
In A Game of Chicken: Daadler on US-Iran Talks
Audio Summary
AI Summary
फिलहाल कूटनीतिक प्रगति की संभावना कम है क्योंकि दोनों पक्ष अधिकतम मांगें रख रहे हैं। जब हर कोई दूसरे पक्ष से हार मानने को कहेगा, तो कोई नतीजा नहीं निकलेगा। समस्या यह है कि दोनों पक्ष यह मानते हैं कि उनके पास दूसरे पक्ष की तुलना में अधिक प्रभाव है, जो कि सच नहीं है। एक पक्ष को लगता है कि नाकेबंदी जारी रहने से ईरान जल्द ही हार मान लेगा, जबकि दूसरे पक्ष को लगता है कि बढ़ती कीमतें, खासकर अमेरिका में, अमेरिका को हार मानने पर मजबूर कर देंगी। यह एक "गेम ऑफ चिकन" है जहां सवाल यह है कि पहले कौन पीछे हटेगा।
ईरान के प्रभाव को कम करके आंका जा रहा है, और साथ ही, युद्ध की शुरुआत से ही, ईरान के लोगों की, उसकी अर्थव्यवस्था की, और उसकी सैन्य क्षमता की भारी क्षति सहने की इच्छा को भी कम करके आंका गया है। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, किसी एक पक्ष को यह तय करना होगा कि वे अब और नहीं सह सकते।
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए अलग प्रतिनिधियों की आवश्यकता है। वर्तमान राष्ट्रपति ने रियल एस्टेट पेशेवरों को भेजा है, जबकि इस तरह की जटिल बातचीत के लिए अनुभवी राजनयिकों और वैज्ञानिकों की आवश्यकता होती है। ओबामा प्रशासन के दौरान, परमाणु भौतिक विज्ञानी जैसे विशेषज्ञ बातचीत में शामिल थे। वर्तमान प्रतिनिधियों के पास परमाणु मुद्दों पर पर्याप्त ज्ञान नहीं है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के संबंध में, राष्ट्रपति ट्रम्प ने जल्द ही समझौते की संभावना जताई है, लेकिन एक साल से अधिक समय से ऐसा कहते रहने के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। समस्या यह है कि रूस ने बिना किसी कारण के एक पड़ोसी देश पर हमला किया और उसके एक हिस्से पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। जब तक रूस यह नहीं पहचानता कि वह यह जीत हासिल नहीं कर सकता, तब तक युद्ध का अंत नहीं होगा। यूक्रेनी लोगों ने कड़ाके की सर्दी झेल ली है, और अब वे ड्रोन युद्ध के माध्यम से रूसी सेना को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे पुतिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, पुतिन ने अभी तक शांति की दिशा में कोई वास्तविक कदम नहीं उठाया है।